सोनिया ने बताया, 2004 में क्यों ठुकराया था PM पद:बोलीं- राहुल और प्रियंका भी नहीं चाहते थे कि मैं प्रधानमंत्री बनूं
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2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने का फैसला सोनिया गांधी की जिंदगी के सबसे चर्चित राजनीतिक फैसलों में से एक रहा है। अपनी किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ में उन्होंने बताया है कि राहुल और प्रियंका भी नहीं चाहते थे कि वे प्रधानमंत्री बनें। 10 नवंबर को लॉन्च होने वाली इस किताब पर ‘द हिंदू’ को दिए इंटरव्यू में सोनिया ने इस फैसले से लेकर राजीव गांधी के साथ अपने रिश्ते, इमरजेंसी, कांग्रेस के भविष्य और देश की मौजूदा राजनीति पर बात की।
उन्होंने कहा कि भारत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सोच अलग है। सोनिया ने पिछले 12 साल में देश के लोकतंत्र और संस्थाओं को हुए नुकसान पर भी चिंता जताई। साथ ही कहा, ‘राजीव से मुलाकात के 60 साल बाद भी मैं वही इंसान हूं, बस अब पहले जितना हंसती नहीं।’ सवाल: आपने X पर लिखा- ‘दूसरे लोग दशकों से मेरी कहानी बताते रहे हैं, अब मेरी बारी है।’ AI की मदद से पता चला कि आपके जीवन पर कम से कम 75 किताबें लिखी जा चुकी हैं।' क्या आपने इनमें से कुछ पढ़ी हैं या कभी जानने की कोशिश की कि दूसरे लोग आपकी कहानी को किस तरह देखते हैं?
जवाब: मुझे तो अंदाजा ही नहीं था कि इतनी सारी किताबें हैं!
लेकिन मैंने कभी अपने बारे में लिखी किताबें पढ़ने की इच्छा महसूस नहीं की। बहुत पहले राजीव और मैंने समझ लिया था कि हमारे बारे में जो कुछ भी लिखा जा रहा है, उसे पढ़ते रहना व्यर्थ है। लेकिन जैसा कि मैंने अपनी किताब में भी कहा है, एक समय ऐसा आया जब मुझे लगा कि अब मुझे अपनी कहानी खुद बतानी चाहिए। सवाल: किताब लिखने में कुल कितना समय लगा?
जवाब: इतना लंबा समय बीत चुका है कि अब ठीक-ठीक याद भी नहीं कि इसकी शुरुआत कब हुई थी। इतना जरूर कह सकती हूं कि मैंने पहली बार कुछ लिखना एक दशक से भी पहले शुरू किया था। हालांकि, गंभीरता से लिखना करीब पांच साल पहले ही शुरू किया। यह सिलसिला लगातार नहीं चला। कभी ऐसा होता था कि शब्द और विचार अपने आप आते चले जाते थे, तो कभी कुछ भी लिखना मुश्किल हो जाता था। ऐसे मौकों पर मैं निराश होकर हाथ खड़े कर देती थी। सवाल: आपने ‘बिलॉन्गिंग’ को व्यक्तिगत संस्मरण बताया है, लेकिन इसके केंद्र में राजीव गांधी के साथ आपकी प्रेम कहानी भी है। क्या यह सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है?
जवाब: हां!
यही एक वजह थी कि इतने लंबे समय तक मेरी इस कहानी के बारे में बात करने की इच
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar