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ऑटोइम्यून बीमारियों पर एम्स समेत 6 संस्थानों में शोध

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 29 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ऑटोइम्यून बीमारियों पर एम्स समेत 6 संस्थानों में शोध

अक्टूबर 29, नई दिल्ली: एक ही परिवार के कई सदस्यों में ऑटोइम्यून बीमारियां क्यों होती हैं और इनके पीछे आनुवंशिक या पर्यावरणीय कारकों की क्या भूमिका है, इसका पता लगाने के लिए एम्स नई दिल्ली समेत देश के छह प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शोध किया जा रहा है।

चार साल तक चलने वाले इस अध्ययन में 200 परिवारों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। शोध के जरिए ऑटोइम्यून बीमारियों के साझा कारणों को समझने और भविष्य में इनके नए उपचार विकसित करने के लिए जरूरी जानकारी जुटाने की कोशिश की जाएगी।

शोधकर्ताओं ने ऐसे परिवारों से अध्ययन में शामिल होने की अपील की है, जिनमें एक सदस्य ल्यूपस से पीड़ित है और परिवार के अन्य सदस्य भी किसी ऑटोइम्यून बीमारी से प्रभावित हैं। इस अध्ययन से इन बीमारियों के संभावित कारणों और पारिवारिक संबंधों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।

(वीडियो कैप्शन: एक ही परिवार के कई सदस्यों में ऑटोइम्यून बीमारियां क्यों होती हैं और इनके पीछे आनुवंशिक या पर्यावरणीय कारकों की क्या भूमिका है, इसका पता लगाने के लिए एम्स नई दिल्ली समेत देश के छह प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शोध किया जा रहा है।)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

ऑटोइम्यून बीमारियों पर एम्स नई दिल्ली समेत देश के छह प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शोध चल रहा है, जिसका उद्देश्य एक ही परिवार के कई सदस्यों में इन रोगों के होने के आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों को उजागर करना है। यह अध्ययन 200 परिवारों को चार वर्ष तक फॉलो करेगा। इस विषय की महत्ता इसलिए है क्योंकि ऑटोइम्यून रोगों की बढ़ती दर और उनके जटिल रोगजनन को समझना रोग निवारण और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। आम जनता के लिए इसका असर यह है कि जीन और जीवनशैली के बीच के संबंधों को जानकर रोगों की रोकथाम

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।