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कदीमी मस्जिद को हटाने के प्रस्ताव का जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने किया विरोध, मलिक मोतसिम खान बोले—धर्मनिरपेक्षता के नाम पर ऐतिहासिक इबादतगाह नहीं मिटाई जा सकती

लेखक: Sanjida Khanam अंतिम अपडेट: 4 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कदीमी मस्जिद को हटाने के प्रस्ताव का जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने किया विरोध, मलिक मोतसिम खान बोले—धर्मनिरपेक्षता के नाम पर ऐतिहासिक इबादतगाह नहीं मिटाई जा सकती

कृषि भवन परिसर की एक सदी पुरानी मस्जिद को लेकर सरकार से कानूनी आधार स्पष्ट करने की मांग, मामला अदालत में रहने तक यथास्थिति बनाए रखने की अपील

नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कृषि भवन परिसर स्थित कदीमी मस्जिद को हटाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का हवाला देकर एक ऐतिहासिक इबादतगाह को हटाने का प्रस्ताव नहीं रख सकती। धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करना है, न कि किसी लंबे समय से स्थापित धार्मिक स्थल को समाप्त करना।

मलिक मोतसिम खान ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि सरकारी परिसरों में किसी भी धर्म के लोगों के लिए प्रार्थना की सुविधा पर रोक लगाने का कानूनी आधार क्या है। उन्होंने मस्जिद के इतिहास और लंबे समय से हो रहे धार्मिक उपयोग को मान्यता देने की मांग करते हुए कहा कि जब तक मामला अदालत में विचाराधीन है, तब तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिसे बाद में बदला न जा सके।

उन्होंने दावा किया कि कदीमी मस्जिद कृषि भवन परिसर के निर्माण से पहले से मौजूद है। उनके अनुसार, सरकारी कार्यालय मस्जिद के आसपास बनाए गए थे। उन्होंने मस्जिद से संबंधित वर्ष 1970 की वक्फ अधिसूचना और वर्ष 1940 के उस समझौते का भी उल्लेख किया, जिसमें नमाज के लिए इसके उपयोग को मान्यता दिए जाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक और कानूनी पहलुओं पर उचित विचार किए बिना किसी पुनर्विकास परियोजना के तहत मस्जिद के धार्मिक उपयोग को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।

अनुच्छेद 25 और धार्मिक स्वतंत्रता का दिया हवाला

मलिक मोतसिम खान ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि यह नागरिकों को धर्म मानने और उसका पालन करने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने कहा कि दशकों से केंद्रीय सचिवालय में कार्यरत मुस्लिम कर्मचारी और वहां आने वाले लोग नमाज के लिए इस मस्जिद पर निर्भर रहे हैं। उनके अनुसार, सरकार को इस धार्मिक सुविधा और उससे जुड़े लोगों के अधिकारों का ध्यान रखना चाहिए।

उन्होंने सरकार की धर्मनिरपेक्षता संबंधी व्याख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय धर्मनिरपेक्षता सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना पर आधारित है। उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों और सरकारी परिसरों में विभिन्न धार्मिक परंपराओं एवं प्रतीकों की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए पूछा कि फिर एक ऐतिहासिक मस्जिद को हटाने का प्रस्ताव किस आधार पर उचित ठहराया जा रहा है।

पुनर्विकास परियोजना में मस्जिद को शामिल करने की मांग

जमाअत के उपाध्यक्ष ने कहा कि मस्जिद समिति सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना को रोकना नहीं चाहती है। उनकी मांग है कि सरकार परियोजना में मौजूदा प्रार्थना स्थल की सुरक्षा और उसके संरक्षण को शामिल करने के लिए लचीलापन दिखाए। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के साथ लंबे समय से धार्मिक उपयोग में रहे स्थलों और उनसे जुड़े लोगों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाना चाहिए।

मलिक मोतसिम खान ने केंद्र सरकार से मस्जिद को हटाने की योजना पर पुनर्विचार करने, प्रस्ताव के कानूनी आधार को सार्वजनिक करने और न्यायसंगत समाधान निकालने की अपील की।

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Sanjida Khanam

Sanjida Khanam डिजिटल हिंदी पत्रकारिता के साथ सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग में सक्रिय हैं।