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एकता नगर का ट्राइबल कैफे: पारंपरिक व्यंजनों को मिल रही पहचान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 30 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एकता नगर का ट्राइबल कैफे: पारंपरिक व्यंजनों को मिल रही पहचान

अक्टूबर 30, नई दिल्ली: गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अलावा भी कई ऐसे स्थान हैं, जो देश की विविध और समावेशी संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं। इन्हीं में से एक है ट्राइबल कैफे, जहां आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय हुनर को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस कैफे की खासियत यह है कि इसका पूरा संचालन स्थानीय आदिवासी महिलाएं करती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप शुरू किए गए इस कैफे का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति को मुख्यधारा से जोड़ना और स्थानीय महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। यहां महिलाएं कैफे के संचालन से लेकर खान-पान की व्यवस्था तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

कैफे में परोसी जाने वाली पारंपरिक ट्राइबल थाली पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। इसमें स्थानीय अनाज और पारंपरिक व्यंजनों को शामिल किया गया है, जो क्षेत्र की खान-पान की संस्कृति से परिचित कराते हैं। इसके जरिए स्थानीय व्यंजनों को भी नई पहचान मिल रही है।

कैफे के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को रोजगार और अपनी संस्कृति को प्रदर्शित करने का मंच मिल रहा है। यह पहल स्थानीय हुनर को प्रोत्साहित करने और जनजातीय समुदाय की आजीविका के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।