अनुबंध कर्मचारियों को सेवा लाभ देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से सरकार को झटका, रिव्यू पिटीशन खारिज
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़े अनुबंध सेवा अवधि के लाभ के मामले में प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। अनुबंध कर्मचारियों को सेवा अवधि के लाभ देने से संबंधित हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एक्ट, 2024 को लेकर सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका यानी रिव्यू पिटीशन खारिज हो गई है।
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश के करीब डेढ़ लाख कर्मचारियों को अनुबंध सेवाकाल के वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।यह पूरा विवाद उन कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्होंने नियमित नियुक्ति से पहले कई वर्षों तक सरकारी विभागों में अनुबंध आधार पर सेवाएं दी हैं। कर्मचारियों की मांग रही है कि नियमित नियुक्ति से पहले की अनुबंध सेवा को भी उनकी सेवा अवधि में शामिल किया जाए और इसी आधार पर वित्तीय लाभ तथा वरिष्ठता निर्धारित की जाए।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2003 से सरकारी विभागों में अनुबंध आधार पर भर्तियां होती रही हैं। इस दौरान कर्मचारियों ने नियमित होने से पहले अलग-अलग अवधि तक सेवाएं दीं। इनमें कुछ कर्मचारियों का अनुबंध सेवाकाल आठ वर्ष सात महीने, कुछ का सात वर्ष, तीन वर्ष अथवा दो वर्ष तक रहा है। नियमितीकरण के बाद कर्मचारी इस अवधि को सेवा लाभों की गणना में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर कई कर्मचारी अदालत पहुंचे और उन्हें अलग-अलग मामलों में न्यायिक राहत भी मिली।
अनुबंध कर्मचारियों के वित्तीय लाभ को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रदेश सरकार ने वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एक्ट पारित किया था। इस कानून के तहत अनुबंध और नियमित कर्मचारियों की सेवा शर्तों को अलग-अलग रखने का प्रावधान किया गया। कर्मचारियों ने इस कानून को चुनौती देते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
उनका तर्क था कि इस व्यवस्था से अनुबंध अवधि के दौरान दी गई सेवाओं और उनसे जुड़े लाभों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।इस मामले में 25 अप्रैल 2026 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। देवेंद्र कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार मामले से जुड़ी कुल 445 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने वर्ष 2024 के संबंधित कानून को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया था।
इसके बाद प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
प्रदेश सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को खारिज कर दिया था। इसके साथ ही कर्मचारियों को देय वित्तीय लाभों के भुगतान के लिए चार महीने की समयसीमा दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि, सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी।
अब इस याचिका के भी खारिज होने से अनुबंध कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।वहीं, हिमाचल हाईकोर्ट में इस मामले के मुख्य याचिकाकर्ता और ऊना जिला के कॉलेज प्रवक्ता देवेंद्र एटलस ने बताया कि सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद अब प्रदेश सरकार के पास राहत पाने के विकल्प सीमित रह गए हैं।
ऐसे में अब अदालतों के निर्देशों की अनुपालना और कर्मचारियों को उनके देय सेवा लाभ प्रदान करना महत्वपूर्ण होगा।