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‘आत्मज्ञान से मिलती है आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास’, पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
‘आत्मज्ञान से मिलती है आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास’, पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित

DATE- 4 nOVEMBER 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें आत्मज्ञान, अनुभव और विद्या के माध्यम से आंतरिक शक्ति, परम शांति और अमरत्व का संदेश दिया गया है। प्रधानमंत्री ने संस्कृत श्लोक, “प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते। आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम्॥” साझा किया है।

इसका हिंदी भावार्थ है कि आत्मज्ञान से मनुष्य को आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानना ही सच्चा ज्ञान है। अनुभव और विद्या के माध्यम से प्राप्त यह ज्ञान मनुष्य को मानसिक तनाव से मुक्त कर आत्मिक शांति की ओर ले जाता है। यही ज्ञान जीवन में परम शांति और अमरत्व की अनुभूति का मार्ग प्रशस्त करता है।

पीएम मोदी की ओर से साझा किया गया यह श्लोक केनोपनिषद के तृतीय खंड के द्वितीय अध्याय का चौथा मंत्र है। केनोपनिषद सामवेदीय शाखा का एक प्रमुख उपनिषद है। इस उपनिषद में ब्रह्म (परम सत्य) के स्वरूप पर चर्चा की गई है। इसमें यह समझाया गया है कि ब्रह्म को संसार की सामान्य वस्तुओं या इंद्रियों के विषयों की तरह नहीं जाना जा सकता, बल्कि वह हमारी हर चेतना और आंतरिक बोध का आधार है।

इस श्लोक के माध्यम से बताया गया है कि ब्रह्म कोई बाहर की वस्तु नहीं है जिसे कहीं खोजा जाए; बल्कि हमारे भीतर होने वाले प्रत्येक ज्ञान, विचार और चेतना के हर स्तर पर जो द्रष्टा या साक्षी के रूप में विद्यमान है, वही सच्चा ब्रह्म है। जब व्यक्ति को हर अनुभूति में उस परम सत्य का बोध होता है, तब वह अज्ञान और मृत्यु (संसार-चक्र) से मुक्त हो जाता है।

इसके माध्यम से बताया गया है कि संसार में मिलने वाली भौतिक वस्तुएं, पद या धन से प्राप्त बल नाशवान होता है। वास्तविक और अटूट आध्यात्मिक शक्ति केवल अपनी आत्मा को पहचानने से ही मिलती है। अविद्या (अज्ञान) मनुष्य को बंधनों और दुखों में डालती है। ब्रह्मविद्या या आत्मज्ञान ही वह साधन है जो अज्ञान का नाश करके मनुष्य को अमरत्व और परम मुक्ति की ओर ले जाता है। इस श्लोक के माध्यम से संदेश दिया गया है कि परम सत्य को किताबी ज्ञान या बाहरी खोज से नहीं, बल्कि अपने भीतर की चेतना और आत्मबोध के द्वारा ही जाना जा सकता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।